Ye Jo Halka Halka Suroor Hain (Full Song) Lyrics -
साकी की हर निगाह पे बलखाके पी गया
लहरों से खेलता हुआ लहरा के पी गया
ऐ रेहमत-ए-तमाम मेरी हर खाता मुआफ
में इन्तहा-ए-शौक में घबरा के पी गया
पिता बगैर इजल ये कब थी मेरी मजाल
दर पर्दा चश्मे यार की शय पा के पी गया
जाहिद ये मेरी शौखी ये रिन्दाना देखना
तौबा को तोड़ ताड के थर्रा के पी गया
तेरी पाईल अगर छनक जाए
गर्दिशे अस्मा ठिठक जाए
तेरे हसने की कैफियत तौबा
जैसे बिजली चमक चमक जाए
तेरी गर्दन का तस्करा सुन कर
जो सुराही है वो छलक जाए
ले अगर झूम कर तू अंगड़ाई
ज़िन्दगी दार पर लटक जाए
चूर है ऐसे बाकपन तेरा
जैसे डस डस के सांप थक जाए
तेरी आँखों को देख पाए अगर
जो फ़रिश्ता हो वो बहक जाए
पास रहता है दूर रहता है
कोई दिल में जरुर रहता है
जब से देखा है तेरी आँखों को
हल्का हल्का सुरूर रहता है
ऐसे रहते है वो मेरे दिल में
जैसे ज़ुल्मत में नूर रहता है
अब अदम का ये हल है हर वक़्त
मस्त रहता है चूर रहता है
ये जो हल्का हल्का सुरूर है
ये तेरी नज़र का कुसूर है
के शराब पीना सिखा दिया
ये जो हल्का हल्का सुरूर है
ये तेरी नज़र का कुसूर है
के शराब पीना सिखा दिया
तेरे प्यार ने तेरी चाह ने
तेरी बहकी बहकी निगाह ने
मुझे एक शराबी बना दिया
शराब कैसी, खुमार कैसा
ये सुब तुम्हारी नवाज़िशें हैं
पिलाई है किस नज़र से तू नै
के मुझको अपनी खबर नहीं है
तेरी बहकी बहकी नीगाह नै
मुझे इक शराबी बना दिया
सारा जहान मस्त , जहां का निजाम मस्त
दिन मस्त, रात मस्त, सहर मस्त शाम मस्त
खुद मस्त, शीशा मस्त, सब मस्त जाम मस्त
है तेरी चश्म-ए-मस्त से हर खास-ओ-आम मस्त
यूँ तो साकी हर तरह की तेरे मैख़ाने में है
दे वो भी थोड़ी सी जो इन आँखों के पैमाने में है
सब समझता हु तेरी इशवा-करी ऐ साकी
काम करती है नज़र नाम है पैमाने का
बस...
तेरी बहकी बहकी निगाह नै
मुझे इक शराबी बना दिया
मेरे साकी साकी, मेरे साकी ........
लहरा के झूम, झूम के ला, मुस्कुरा के ला
फूलो के रस में चाँद की किरने मिला के ला
सागर सिकन है शैख़ पिला नौश की नज़र
शीशे को जैर-ए-दमन-ए-रंगी छुपा के ला
कहते है उम-ए-रफ्ता कभी लौटती नहीं
जा मयकदे से मेरी जवानी उठा के ला
मेरे साकी साकी, मेरे साकी ........
मेने माना जनाब पिता हु
बखुदा बेहिसाब पिता हु
लोग लोगो का खून पीते है
में तो फिर भी शराब पिता हु
मेरे साकी साकी, मेरे साकी ........
मेने माना जनाब पिता हु
बखुदा बेहिसाब पिता हु
लोग लोगो का खून पीते है
में तो फिर भी शराब पिता हु
जिंदगी का अजब पिता हु
बन्दे खाना ख़राब पिता हु
रोज-ए-महशर हिसाब हो ना सके
इसलिए बेहिसाब पिता हु
मेरे साकी साकी, मेरे साकी ........
मेरी नज़र को ज़ुनू का पयाम दे साकी
मेरे हयात को ला वा निशाम दे साकी
ये रोज़ रोज़ का पीना मुझे पसंद नहीं
कभी ना होश में आऊ वो जाम दे साकी
मेरे साकी साकी, मेरे साकी ........
तेरे शीशे में मय बाकि नहीं है
बता क्या तू मेरा साकी नहीं है
समंदर से मिले प्यासे को सबनम
बखीली है ये रज्जकी नहीं है
कहा जिस जिस ने उसके सामने
नहीं सिकवा कशी शय में शराबे अरगवा रख दी
इला ये है भुला कर रश्म-ए-रहो दोस्त रख दी
कहा जिस जिस ने उसके सामने
बे इनो आ रख दी
जो हम आए तो बोतल क्यू अलग पिरे मुआ रख दी
पुरानी दोस्ती भी तक पर ऐ मेहरबा रख दी
वो मय दे दे जो पहले शिबली ओ मंसूर को दी थी
पिला दे ओक से साकी जो मुझसे नफरत है
साकी तेरी हो खैर तेरे मयकदे की खैर
ऐसी पिला के जिसका नशा उम्र भर रहे
मेरे साकी साकी, मेरे साकी ........
थोड़ी दे दे, बाती दे दे, मांगता नहीं गुलाबी
कन खोल के सुनले मेंते नहीं वहाबी
मेरे साकी साकी, मेरे साकी ........
ले ले दिल-ओ-जान नजराना पयमाना दे पयमाना
आया है तेरा मस्ताना पयमाना दे पयमाना
साकीया मेरा एक काम कर दे
सारा मयखाना मेरे नाम कर दे
एक दो जाम से मेरा क्या बनता है
बस..
सारा मयखाना मेरे नाम कर दे
साकी मुझे शराब की तोहमत नहीं पसंद
मुझको तेरी निगाह का इलज़ाम चाहिए
मेरे साकी साकी, मेरे साकी ........
ये अपनी मस्ती है जिसने मचाई है हल चल
नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
या काली काली बोतले जो है शराब की
रराते है इनमे बंद हमारे शबाब की
जो खाए शैख़ ने अंगूर तो यजदा से कह दूंगा
ये मय की गोलिया खाता है में बोतल से पिता हु
मेरे साकी साकी, मेरे साकी ........
अच्छी पिली, ख़राब पिली
थी आग मिसाल-ए-हबाब पिली
आदत है अब तो नशा है ना कैफ
पानी ना पिया शराब पिली
नशा इमान होता है, सुराही दीन होती है
जवानी की इबादत किस कदर रंगीन होती है
तुम्हारा हुस्न अगर बेनकाब हो जाए
हर एक चेहरा खुदा की किताब हो जाए
शराबियों को इस कदर अकीदत है तुम से
जो तुम पिला दो तो पानी शराब हो जाए
दिल उसका नमाज़ी बन जाए
आंख उसकी गुलाबी हो जाए
तू जिसको मोहब्बत से देखे
साकी वो शराबी हो जाए
मेरे साकी साकी, मेरे साकी ........
यूँ तो साकी हर तरह की तेरे मैख़ाने में है
दे वो भी थोड़ी सी जो इन आँखों के पैमाने में है
सब समझता हु तेरी इशवा-करी ऐ साकी
काम करती है नज़र नाम है पैमाने का
तेरी बहकी बहकी निगाह नै
मुझे इक शराबी बना दिए...
तेरा प्यार है मेरी ज़िन्दगी
तेरा प्यार है मेरी ज़िन्दगी
तेरा प्यार है बस मेरी ज़िन्दगी
तेरा प्यार है बस मेरी ज़िन्दगी
ना नमाज़ आती है मुझको, ना वजू आता है
सजदा कर लेता हूँ, जब सामने तू आता है
क्यूके....
बस मेरी ज़िन्दगी तेरा प्यार है ....
बस मेरी ज़िन्दगी तेरा प्यार है ....
मे अज़ल से बंदा-ए-इश्क हूं, मुझे जो-दो-कुफ्र का गम नहीं
मेरे सर को दर तेरा मिल गया , मुझे अब तलाश-ए-हरम नहीं
मेरी बंदगी है वो बंदगी, जो कैद -ए-दर-ओ-हरम नहीं
मेरा इक नज़र तुझे देखना, वो नमाज़ से काम नहीं
बस मेरी ज़िन्दगी तेरा प्यार है ....
बस मेरी ज़िन्दगी तेरा प्यार है ....
तेरा नाम लू जुबा से, तेरे आगे सर झुका दूँ
मेरा इश्क कह रहा है, में तुझे खुदा बना लूँ
तेरा नाम मेरे लब पर, मेरा तजकरा है गर गर
मुझे भूल जाए दुनिया, में अगर तुझे भुला दूँ
मेरे दिल में बस रहे है, तेरे बेपनाह जलवे
ना हो जिस में नूर तेरा, वो चराग ही बुझा दूँ
तेरी दिल लगी के सदके
तेरी संगदिली के कुरबा
मेरे गम पे हसने वाले
तुझे कोन सी दुआ दू
क़यामत में तेरा दाग-ए-मोहब्बत ले कर उठूँगा
तेरी तस्वीर उस दम भी कलेजे से लगी होगी
तेरा प्यार मेरी ज़िन्दगी तेरा प्यार है ....
तेरा प्यार मेरी ज़िन्दगी तेरा प्यार है ....
तेरा प्यार है मेरी ज़िन्दगी
तेरी याद है मेरी बंदगी
जो तेरी ख़ुशी वो मेरी ख़ुशी
ये मेरे जुनू का है मोजजा
जहा अपने सर को झुका दिया
वही मेने काबा बना दिया
मेरे बाद किसको सताओगे
मेने उनके सामने अव्वत तो खंजर रख दिया
फिर कलेजा रख दिया, दिल रख दिया, सर रख दिया
और अर्ज किया
मेरे बाद किसको सताओगे
दिल जलो से दिल लगी अच्छी नहीं
रोने वालो से हसी अच्छी नहीं
दिल लगी ही दिल लगी में दिल गया
दिल लगाने का नतीजा मिल गया
में तो रोता हु की मेरा दिल गया
तुम क्यों हस्ते हो तुम्हे क्या मिल गया
अच्छा..... फिर....
मेरे बाद किसको सताओगे
जो पूछा के किस तरह होती है बारिश, जबी से पसीने की बुँदे गिरा दी
जो पूछा के किस तरह गिरती है बिजली, निगाहें मिलाई मिला का झुका दी
जो पूछा शब-ओ-रोज़ मिलते है कैसे, तो चेहरे पे अपने वो जुल्फें गिरा दी
जो पूछा के नगमों में जादू है कैसा, तो मीठे तकल्लुम में बाते सुना दी
जो अपनी तमन्नाओ हाल पूछा, तो जलती हुई चंद शम्मे बुझा दी
में कहता रह गया खाता-ए-मोहब्बत की अच्छी सजा दी
मेरे दिल की दुनिया बना कर मिटा दी
अच्छा..
मेरे बाद किसको सताओगे
मेरे बाद किसको सताओगे
मुझे किस तरह से मिटाओगे
कहाँ जा के तीर चलाओगे
मेरी दोस्ती की बलाएँ लो
मुझे हाथ उठा कर दुआएँ दो
तुम्हें एक कातिल बना दिया
ये जो हल्का हल्का सुरूर है
ये तेरी नज़र का कुसूर है
के शराब पीना सिखा दिया